नई दिल्ली, अप्रैल 6 -- देश में चुनावी प्रक्रिया भी जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रही है। बढ़ती गर्मी, अनियमित बारिश और बदलते मौसम से मतदान प्रभावित होने लगे हैं। गर्मी की स्थिति तय कर रही है कि कौन वोट देने आएगा, और कौन बीच रास्ते से ही लौट जाएगा। 'क्लाइमेट ट्रेंड्स' के विश्लेषण के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन चुनावी प्रक्रिया के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। अप्रैल में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में हो रहे चुनावों में 17.4 करोड़ मतदाता और दो लाख से अधिक मतदान केंद्र शामिल हैं, लेकिन मौसम की अनिश्चितता इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। हाल के वर्षों में अप्रैल का तापमान लगातार बढ़ा है। वर्ष 2022 में यह सामान्य से 1.36 डिग्री अधिक रहा, जबकि 2025 में भी यह अंतर 0.86 डिग्री दर्ज किया गया। इसका असर यह है कि दोपहर म...
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