कैसे हुआ मां धूमावती का मां पार्वती से जन्म, एक श्राप के कारण विवाहित महिलाएं नहीं करती इनकी पूजा
नई दिल्ली, जून 16 -- धुएं से प्रकट हुईं धूमावती माता दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या धूमावती की जयंती ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। ऋग्वेद में सती के धूमावती रूप को सुतरा कहा गया है। इस साल धूमावती जयंती 22 जून को है। धूमावती के कुछ अन्य नामों में ज्येष्ठा, अलक्ष्मी और निर्ऋति भी है। धूमावती के इस स्वरूप की दो भुजाएं हैं, जिसमें एक हाथ में सूप तथा दूसरा हाथ वरदान मुद्रा में है या ज्ञान प्रदायनी मुद्रा में है। उनका यह स्वरूप कुरूप, खुले हुए केश, दुबली-पतली, सफेद साड़ी पहने हुए बिना अश्व के रथ पर सवार हैं, जिसके शीर्ष पर ध्वज एवं प्रतीक के रूप में कौआ विराजमान रहता है।क्यों हैं इनका नाम धूमावती इनके इस नामकरण के पीछे एक कथा है। कहा जाता है कि एक बार सती के पिता राजा दक्ष ने अपने यहां विशाल यज्ञ का आयोजन किया,...
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