जौनपुर, मार्च 22 -- जलालपुर। स्थानीय रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्री रामकथा में रविवार को राम वनवास और केवट प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। मानस मर्मज्ञ अंशपूर्णानंद महाराज ने कथा सुनाते हुए ऐसा भावपूर्ण चित्रण किया कि पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा में बताया कि रानी कैकेयी ने दासी मंथरा के बहकावे में आकर राजा दशरथ से दो वरदान मांगे, जिसके चलते भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास मिला और भरत को राजगद्दी। पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए राम ने सहर्ष वन गमन स्वीकार किया। इस प्रसंग ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। का व्यास ने कहा कि राम का वनवास केवल एक घटना नहीं, बल्कि त्याग, कर्तव्य और आदर्श जीवन का संदेश है। आज के समय में जहां संपत्ति को लेकर रिश्तों में दरार आ रही है, वहीं रामकथा त्याग और परिवार क...