रांची, नवम्बर 8 -- जिस उम्र में बच्ची को मां की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उस वक्त वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। इलाज के लिए उसे मुंबई तक ले जाना पड़ा, लेकिन पति का आरोप था कि पत्नी न तो इलाज के दौरान साथ रही और न ही बच्ची की देखभाल की। सात माह की बेटी को छोड़कर मायके गई पत्नी फिर पति के पास नहीं लौटी। करीब 18 साल पुराने इस वैवाहिक विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए पत्नी की तलाक के खिलाफ अपील खारिज कर दी। अदालत ने बीमार बच्ची की देखभाल नहीं करने और लंबे समय तक पति से अलग रहने को वैवाहिक क्रूरता और परित्याग के दायरे में माना। हालांकि, पत्नी को गुजारा भत्ते के रूप में मिलने वाले 10 हजार रुपये प्रतिमाह को बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिए। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने पिंकी कुमारी की प्रथम अपील पर ...