केवल एक मौका काफी नहीं होता; कोर्ट ने खास टिप्पणी करते हुए मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले को किया रद्द
नई दिल्ली, जुलाई 28 -- दिल्ली की एक अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता महिला को अपने बचाव के लिए सबूत पेश करने का मौका दे दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशंस जज शेफाली बरनाला टंडन ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून के तहत एक मौका 'पर्याप्त' मौका नहीं होता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संविधान निष्पक्ष ट्रायल की गारंटी देता है, जिसमें आरोपी को बचाव के लिए उचित अवसर देना भी शामिल है। इस मामले को लेकर 22 जुलाई को जारी एक आदेश में अदालत ने कहा, 'कानून में अच्छी तरह से बताया गया है कि निष्पक्ष ट्रायल ही न्याय की नींव है और आरोपी को बचाव पेश करने का मौका दिए बिना, ट्रायल न्यायिक प्रक्रिया के बजाय केवल एक औपचारिकता भर बन जाता है।' यह रिवीजन पिटीशन मंजू देवी नाम की महिला...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.