दरभंगा, अगस्त 4 -- शेष नारायण झा,केवटी। मिथिला की लोक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक मधुश्रावणी पर्व सोमवार से श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया। विवाह के प्रथम वर्ष में नवविवाहिताएं भगवान शिव, माता पार्वती एवं विषहरी देवता की पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं। श्रावण कृष्ण पक्ष पंचमी से शुरू होकर शुक्ल पक्ष तृतीया तक चलने वाले इस 15 दिवसीय अनुष्ठान में प्रतिदिन पूजा, लोक कथाओं का श्रवण और पारंपरिक मैथिली लोकगीतों का गायन होता है। इस दौरान परिवार की बुजुर्ग महिलाएं नवविवाहिताओं को धार्मिक परंपराओं, पारिवारिक दायित्वों और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत की जानकारी देती हैं। यह भी पढ़ें- Munger News: नागपंचमी से शुरू हुई मधुश्रावणी, लोकगीतों और कथाओं से गूंजे मैथिल ब्राह्मण परिवार ...