नई दिल्ली, मई 4 -- देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस के लिए मिला-जुला संदेश दिया, लेकिन केरल ने पार्टी को वह सियासी ऑक्सीजन दी जिसकी उसे लंबे समय से तलाश थी। कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF न सिर्फ सत्ता में लौटा, बल्कि उसने उस वामपंथी ढांचे को भी चुनौती दी, जिसे अब तक लगभग अजेय माना जाता था। लेकिन इस जीत की कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है यह कहानी है उस रणनीति की, जो शोर से दूर रहकर जमीन पर बुनी गई। और इसी कड़ी में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है सचिन पायलट।'सीनियर ऑब्जर्वर' से आगे बढ़कर निभाई निर्णायक भूमिका कांग्रेस हाईकमान ने पायलट को केरल का सीनियर ऑब्जर्वर बनाकर भेजा था, लेकिन उन्होंने इस भूमिका को सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं रखा। पायलट ने चुनावी मैनेजमेंट को माइक्रो लेवल पर हैंडल किया-टिकट वितरण से लेकर...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.