नई दिल्ली, मई 4 -- आरती जेरथ,वरिष्ठ पत्रकार केरलम का परिणाम अप्रत्याशित नहीं है। दस साल बाद यहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट' (यूडीएफ) गठबंधन को सरकार बनाने का मौका मिला है। हालांकि, इस जीत में उसकी अपनी मेहनत से अधिक योगदान 'लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट' (एलडीएफ) के वैचारिक भटकाव और उसके अंदरूनी मतभेदों का है। एलडीएफ का यह दूसरा कार्यकाल था। इस राज्य में हर पांच साल में सरकार बदलने का इतिहास रहा है, लेकिन 2021 में चमत्कारिक रूप से एलडीएफ को न सिर्फ लगातार दूसरा मौका मिला, बल्कि उसके खाते में आठ सीटें अधिक आईं। किंतु मुख्यमंत्री पी विजयन इस सफलता को संभाल नहीं पाए। रही-सही कसर सत्ता-विरोधी रुझान ने पूरी कर दी। नतीजतन, फिर से 'चमत्कार' की एलडीएफ की आस अधूरी रह गई। इस बार एलडीएफ में अंदरूनी मतभेद खूब दिखे। 2021 की चुनावी...
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