केतन को सिर्फ सिया और चेतन ने नहीं मारा! समाज में पढ़ी-लिखी लड़कियां भी क्यों इतनी बेबस?
नई दिल्ली, जून 29 -- भारत का संविधान हमें अपनी मर्जी का जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे आर्टिकल 21 के तहत मिलने वाले 'जीने के अधिकार' और राइट टू प्राइवेसी का एक अहम हिस्सा माना है। फिर हमारे देश में ऐसी क्या विडंबना है कि एक बालिग, पढ़ी-लिखी लड़की को आज भी इस बात की आजादी महसूस नहीं होती है? क्या वजह है कि लड़कियां अपने खुद के परिवारवालों से यह बात साझा नहीं कर पातीं कि उसे वह रिश्ता मंजूर नहीं जो घरवालों ने देखा है और वह अपनी मर्जी के लड़के से ही शादी करेगी? ये सवाल हाल ही में केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। पुणे में एक रियल एस्टेट कंपनी के निदेशक केतन विशाल अग्रवाल की हत्या कैसे और क्यों हुई, इसका खुलासा अब हो चुका है। बीते 18 जून को केतन अपनी मंगेतर सिया गोयल का जन्मदिन मनाने के लिए ल...
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