दुमका, अप्रैल 10 -- रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत ठाड़ी ग्राम में पंचायत भवन के सामने आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन गुरुवार को कथा वाचक धनुधराचार्य के द्वारा संगीतमय वाचन शैली मे भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। उन्होंने श्रोताओं से कहा कि लीला और क्रिया में अंतर होती है। अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है। इसे न तो कर्तव्य का अभिमान है और न ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की, जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे। उन्होंने कहा कि माखन चोरी करने का आशय मन की चोरी से है और कन्हैया ने भक्तों के मन की चोरी की। उन्होंने तमाम बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उपस्थित श्रोताओं को वात्सल्य प्रेम में सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के बाल...