कृषि वैज्ञानिक ने किसानों से हरीखाद के उपयोग की दी सलाह
अंबेडकर नगर, मई 17 -- अम्बेडकरनगर, संवाददाता। वर्तमान कृषि पद्धतियों में अधिक उत्पादन की होड़ के कारण रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग तेजी से बढ़ा है, हालांकि इससे अल्पकालिक लाभ तो मिलता है, लेकिन दीर्घकाल में यह मिट्टी के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है। मिट्टी की उर्वरता में गिरावट, सूक्ष्मजीवों की कमी और भूमि की संरचना का बिगड़ना आज एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। यह बातें कृषि विज्ञान केंद्र पांती शस्य वैज्ञानिक डॉ प्रदीप कुमार कनौजिया ने कही। उन्होंने कहा कि अधिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी का पीएचमान असंतुलित हो जाता है, जिससे फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है। उन्होंने किसानों से गेहूं की फसल कटने के उपरांत खाली पड़े खेतों में गर्मी के मौसम में ढैंचा की बुवाई कर हरी खाद तकनीक को अपनाने की सलाह दी। कहा क...
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