किशनगंज, अप्रैल 13 -- किशनगंज। हिन्दुस्तान टीम खेती-किसानी में दिन-प्रतिदिन चुनौती बढ़ती जा रही है। जलवायु परिवर्तन के दौर में मौसम की अनिश्चितता बढ़ी है। बाढ़, सुखाड़, ओलावृष्टि से फसलों का नुकसान बढ़ता जा रहा है। दूसरी तरफ खाद-बीज के दाम बढ़े हैं। मौसम में बदलाव से पंपिंग सेट से सिंचाई करनी पड़ रही है। मजदूरों की कमी से रोपनी, निकाई-गुड़ाई महंगी होती जा रही है। किसानों के पास संसाधन का अभाव है। उन्हें किराए पर कृषि उपकरण लेकर खेती करनी पड़ रही है। कर्ज लेकर खाद-बीज खरीदना पड़ रहा है। उसके बाद भी तैयार फसल को बेचने में पापड़ बेलने पड़ते हैं। धान-गेहूं, मक्का से लेकर दलहन-तेलहन, सब्जी मंडी में बिचौलिए हावी हैं। कर्ज चुकाने के लिए किसान औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं।बदलते मौसम में उन्नत और मौसम अनुकूल बीज का प्रयोग भी किसानों के लिए चुनौती है...
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