रुडकी, फरवरी 28 -- नारसन, संवाददाता। आर्य समाज मंदिर नारसन कलां में चल रहे तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। वक्ताओं एवं भजनोंपदेशकों ने सभा में कहा कि महर्षि दयानंद का ऋण हम कभी भी नहीं चुका सकते। उत्सव में दोपहर की सभा में वैदिक भजन उपदेशक दिनेश पथिक ने बताया कि महर्षि दयानंद ने जीने की जो कला हमे सिखाई उसका एहसान कभी नहीं भूलना चाहिए। उनको हमने जहर दिया, फिर भी उन्होंने हमे गले से लगाया। भजन के माध्यम से कुरितियों को त्यागने व सत्य को अपनाने की प्रेरणा दी।
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