चंदौली, मार्च 17 -- चंदौली, संवाददाता। मुकद्दस रमजान माह में जो बंदा कुरआन की तिलावत कर उसको समझने की कोशिश करता है तो अल्लाह उसकी जिंदगी आसान कर देता है। कुरआन सिर्फ पढ़ने की किताब नहीं बल्कि जिंदगी का दस्तूर है। रमजान माह में ही कुरआन नाजिल हुआ। इस महीने में इंसान कुरआन से रिश्ता जोड़ता है तो उसके दिल में नूर उतर आता है। कुरआन इंसान को सही और गलत का फर्क सिखाता है। कुरआन की तिलावत दिल को सुकून और रूह को जिंदा कर देती है।यह बातें कारी अली अहमद ने रमजान माह के आखिरी अशरे के 27वीं शब-ए-कद्र में सोमवार की रात मुख्यालय स्थित मदरसे में हदीस बयान करते हुए कही। उन्होंने कहा कि रमजान माह के आखिरी दस में तीन काम जरूर करनी चाहिए। इसमें हर रात खैरात करनी चाहिए। इसके अलावा नफिल नमाज अदा करनी चाहिए। साथ ही सूरह इखलास पढ़ना चाहिए। यदि इस रात लैलतुल क्...