कुरआन-ए-पाक जीने का मुकम्मल तरीका है : हाफिज रहमत अली
गोरखपुर, मई 12 -- गोरखपुर। जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद गोरखनाथ में इस्लामी बहनों के लिए साप्ताहिक दर्स-ए-कुरआन (व्याख्यान) के तीसरे सप्ताह में हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि कुरआन-ए-पाक हिकमत (बुद्धि और ज्ञान) का खजाना है क्योंकि यह न केवल एक पवित्र धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि जीवन के हर पहलू के लिए मार्गदर्शन का स्रोत भी है। कुरआन-ए-पाक में अल्लाह ने इंसानी जिंदगी के तमाम मसाइल और परेशानियों का हल बताया है। यह सिर्फ इबादत की पवित्र किताब ही नहीं, बल्कि जीने का मुकम्मल तरीका है। दर्स में आयशा खातून, शीरीन आसिफ, नाजिया खातून, तानिया अख्तर, आयशा आबिद, सैयदा यासमीन सहित तमाम महिलाएं व छात्राएं मौजूद रहीं। यह भी पढ़ें- इल्म हासिल करना हर मुसलमान का फर्ज
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