हरदोई, सितम्बर 27 -- हरदोई, संवाददाता। कुत्ते या बंदर के काटने के बाद समय पर उपचार से रेबीज से बचाव संभव है, इसके बावजूद जिले में करीब 30 फीसदी लोग आज भी घरेलू नुस्खों पर भरोसा करते हैं। हल्दी, मिर्च, मिट्टी आदि लगाने की वजह से कई बार चिकित्सकीय उपचार में देरी हो जाती है। विश्व रेबीज दिवस की पूर्व संध्या पर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से ऐसी गलती नहीं करने की अपील की है। यह भी पढ़ें- हल्दी-तेल का छोड़ो भ्रम, रेबीज पर टीका ही है बेजोड़ कदमसकारात्मक पहल यह कि जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। वर्तमान में करीब 800 वायल उपलब्ध हैं। एक वायल से औसतन छह लोगों को टीका लगाया जाता है। रोजाना करीब 20 से 25 वायल की खपत हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जरूरत के मुताबिक आपूर्ति बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। जिले में...