गोपालगंज, अप्रैल 12 -- कुचायकोट,एक संवाददाता। रसोई गैस की हो रही किल्लत और आपूर्ति व्यवस्था में गड़बड़ी के कारण ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर परंपरागत ईंधन की वापसी देखने को मिल रही है। गांवों में महिलाएं मजबूरी में उपले (गोबर के कंडे) और लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को विवश हो गई हैं। रसोई गैस की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही, जिससे आम जनजीवन खासकर महिलाओं की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवस्थित हो गई है। कई बार उपभोक्ता घर बैठे सिलेंडर का इंतजार करते रह जाते हैं, जबकि उनके मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज पहले ही आ जा रहा है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। रसोई गैस लेने के लिए बीस किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है । गैस एजेंसियों के गोदाम पर जाने पर पता चल...
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