सराईकेला, मार्च 9 -- खरसावां, संवाददाता। कुचाई प्रखंड के जिलिंगदा गांव में प्रकृति और आदिवासी संस्कृति के महापर्व सरहुल (बाह) पर्व को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई। कुचाई-खरसावां प्रखंड के विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि आदिवासियों के इस प्राकृतिक पर्व को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ 21 मार्च को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति, संस्कृति और समाज के आपसी संबंधों का प्रतीक है। इसे सहेजकर रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक में यह भी चिंता जताई गई कि नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी परंपराओं और संस्कृति से दूर होती जा रही है। इसलिए युवाओं को इस पर्व से जोड़ने, उन्हें जल, जंगल और जमीन के महत्व को सम...