मुंगेर, मार्च 7 -- मुंगेर, निज प्रतिनिधि। कुएं का अस्तित्व मिटता जा रहा है। इस ओर नयी पीढ़ी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जिसके कारण भूगर्भीय जलस्तर भी लगातार नीचे खिसक रहा है। कुआं जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बावजूद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लगभग तीन दशक पूर्व तक अधिकांश गांवों में पेयजल एवं सिंचाई के लिए सबसे अधिक प्रयोग में आने वाले कुआं का वजूद समाप्ति के कगार पर आ गया है। सुविधाभोगी जनमानस को रस्सी के सहारे बाल्टी से पानी खींचना अब मुसीबत लगने लगा है। अधिकांश लोग चापाकल व सबमर्सिबल पर निर्भर हो गए हैं। शहर की बात तो दूर गांव में भी लोग अब नल पर निर्भर होने लगे हैं। शहर के कुछ कुआं में जल स्तर अच्छा है लेकिन जागरूकता के अभाव में वे गंदगी के पर्याय बन गए हैं। सरकारी भवन परिसर में स्थित कुआं का अस्तित्व तो पहले ही समाप्त कर द...
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