नई दिल्ली, मार्च 6 -- वैदिक ज्योतिष में सूर्य और राहु की युति को ग्रहण योग या सूर्य ग्रहण दोष कहा जाता है। सूर्य आत्मा, पिता, आत्मविश्वास, सरकारी काम और नेतृत्व का कारक है, जबकि राहु छाया ग्रह है जो भ्रम, महत्वाकांक्षा, धोखा और अचानक बदलाव लाता है। जब ये दोनों एक ही भाव में साथ होते हैं, तो राहु सूर्य को ग्रहण की तरह ढक लेता है, जिससे सूर्य के गुण कमजोर पड़ जाते हैं। यह योग अशुभ माना जाता है, लेकिन कुंडली के अन्य योगों के आधार पर कुछ सकारात्मक प्रभाव भी दे सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं इसके प्रभाव और बचाव के उपाय।सूर्य-राहु युति क्या है? जब जन्म कुंडली में सूर्य और राहु एक ही राशि और भाव में स्थित होते हैं, तो सूर्य-राहु की युति बनती है। इसे ग्रहण योग कहते हैं, क्योंकि राहु सूर्य को 'ग्रहण' लगा देता है। यह युति जातक की कुंडली में सूर्...
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