नई दिल्ली, सितम्बर 27 -- ज्योतिषीय शास्त्र में पितृ दोष और कालसर्प दोष को जीवन में आने वाली कई तरह की परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है। कुंडली में यह दोष होने पर करियर, धन और पारिवारिक जीवन में रुकावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। भगवान शिव को महाकाल और नागों के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। इसलिए शिव आराधना को इन दोषों की शांति के लिए विशेष माना गया है। शिव पूजा के साथ कुछ मंत्रों का जाप और पितरों के निमित्त किए गए कर्म इन दोषों की शांति में सहायक माने जाते हैं। आइए जानते हैं कालसर्प और पितृ दोष से जुड़े मंत्र और पूजा की विधि।कालसर्प दोष क्या होता है? ज्योतिष में राहु और केतु की विशेष स्थिति को कालसर्प दोष का कारण माना जाता है। जब कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं, तब कालसर्प दोष का निर्माण होता है। इसे ज...