हाजीपुर, अगस्त 14 -- हाजीपुर । संवाद सूत्र देश की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों और शहीदों को जब हम याद करते हैं तो बात बहादुरी और बलिदान पर रुक जाती है, लेकिन एक बड़ा सवाल पीछे छूट जाता है कि क्या देशसेवा ही उनका सपना था, या देशसेवा के लिए उन्होंने कोई और सपना छोड़ दिया। चकफतेह गांव के 22 साल के युवा जयकिशोर सिंह उस पीढ़ी के थे जो मोबाइल, सोशल मीडिया और आधुनिक सपनों के बीच पली-बढ़ी। पिता राज कपूर सिंह बताते हैं उसमें देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रबल इच्छा थी। शहीद जयकिशोर का कोई दूसरा करियर का सपना नहीं था। बड़े भाई नंदकिशोर सिंह पहले से सेना में थे। भाई को वर्दी में देखकर ही उसने भी फौज को चुना। उसके लिए डॉक्टर, इंजीनियर या विदेश का सपना नहीं था। उसका सपना था - तिरंगे की छांव में जीना मातृ भूमि की रक्षा करना। सेना ज्वाइन करने के बाद, 2019...