नई दिल्ली, जनवरी 6 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि कामुक इरादे से किसी छोटे बच्चे को अपने निजी अंगों को छूने के लिए मजबूर करना बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) के तहत गंभीर यौन हमला है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने फैसला सुनाते हुए एक व्यक्ति की अपील को खारिज कर दिया। इस याचिका में आरोपी ने लगभग चार साल की बच्ची के सामने अपने निजी अंग को प्रदर्शित करने व उसे छूने के लिए मजबूर करने पर पोक्सो अधिनियम की धारा 10 (गंभीर यौन उत्पीड़न के लिए सजा) के तहत दोषी करार दिए जाने व सजा सुनाए जाने को चुनौती दी थी। पोक्सो के तहत 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे पर यौन हमला करना गंभीर यौन हमले की श्रेणी में आता है। अपीलकर्ता को निचली अदालत ने जुलाई 2024 में दोषी ठहराया था। दोषी को सात साल के सजा सुनाई थी...
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