नई दिल्ली, मार्च 9 -- दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जबरन वसूली से जुड़े 15 वर्ष पुराने एक मामले में कहा है कि किसी व्यक्ति को डरा-धमकाकर उससे एक रुपये भी लिया जाए तो वह उगाही का अपराध माना जाएगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग की अदालत ने कहा कि जबरन वसूली का अपराध तब माना जाता है, जब किसी व्यक्ति को चोट या नुकसान का डर दिखाकर उससे पैसे या संपत्ति हासिल की जाती है। इसके लिए वसूली गई राशि का सटीक मिलान या पूरी रकम की बरामदगी अनिवार्य शर्त नहीं है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने इस मामले के दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। साथ ही एक महिला आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। यह भी पढ़ें- महिला कॉन्स्टेबल घूस लेते कैमरे में कैद, राहत नहीं दे सकते : दिल्ली हाईकोर्टमयंक मिश्रा और संजीव कुमार को दोषी ठहराया अदालत ने कहा कि इस अपराध की गंभीरता...
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