रांची, मार्च 28 -- रांची। विशेष संवाददाता झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी कर्मचारी की पेंशन केवल एक घटना में अनियमितता के आधार पर नहीं रोकी जा सकती। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि कर्मचारी का पूरा सेवा काल गंभीर रूप से असंतोषजनक रहा हो या उसने गंभीर गड़बड़ी की हो।चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए एकल पीठ का फैसला बरकरार रखा। मामला जल संसाधन विभाग के जूनियर इंजीनियर से जुड़ा था, जिन पर माइक्रोलिफ्ट योजनाओं में वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे। रिटायरमेंट के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनकी पेंशन में पांच वर्षों के लिए 15% कटौती कर दी गई। राज्य सरकार ने दलील दी कि जांच में कर्मचारी दोषी पाए गए और उनकी सेवा संतोषजनक नहीं थी, इसलिए झारखंड पेंशन नियम 200...
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