सीतामढ़ी, अप्रैल 7 -- पुपरी। गेहूं के फसलों की कटाई एवं थ्रेसिंग का काम तेज हो गया है। ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र सीतामढ़ी के वैज्ञानिकों ने जिले के किसानों को गरमा मुंग की खेती शीघ्र शुरू करने का सलाह दिया है। वैज्ञानिक ने बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए एसएमएल 668 प्रजाति की मूंग को लगाने का भी सुझाव दिया है। केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने कहा है कि दलहन खेती से दाल में आत्मनिर्भरता बेहतर होगी। यह खेत में नाइट्रोजन की उपलब्धता को बढ़ाता है। वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार ने बताया कि गेहूं के फसल की कटाई तेज हो चुकी है। कटाई होतें हीं किसान गरमा मुंग की बुआई शुरू कर दें। मुंग की कुछ प्रजातियां जैसे सम्राट, एसएमएल 668, सोना बेहतर प्रजाति है। इसकी बुआई 15 अप्रैल तक कर देने से बेहतर उपज प्राप्त की जा सकती है। पंजीकार ...
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