किसानों-मजदूरों के सच्चे साथी सहजानंद सरस्वती
नई दिल्ली, जून 25 -- नीलांशु रंजन, लेखक एवं पत्रकार सन् 1889 में महाशिवरात्रि के दिन 26 जून को पैदा हुए नवरंग राय, जो आगे चलकर स्वामी सहजानंद सरस्वती के नाम से विख्यात हुए, शिव के बड़े उपासक थे। किसानों, मजदूरों को शोषण से बचाने के लिए उन्होंने असह्य तकलीफें उठाईं। स्वाधीनता आंदोलन से किसानों के मुद्दों को जोड़ने के लिए उन्होंने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया और तब के सभी नेताओं, राजनीतिक दलों से सैद्धांतिक लड़ाइयां मोल लीं। यहां तक कि महात्मा गांधी से भी किसानों के मुद्दे पर उनका मतभेद हो गया, लेकिन वह कभी विचलित नहीं हुए। स्वामीजी का मानना था कि जिस व्यक्ति को शोषितों-पीड़ितों के अधिकारों के लिए, सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करना है, उसे इस बात की फिक्र नहीं होनी चाहिए कि कौन-सी राजनीतिक पार्टी या सामाजिक संस्था उसके साथ है, उसे फिक्र बस यह होनी ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.