बांदा, जून 27 -- बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग ने उपकार परियोजना अन्तर्गत प्राकृतिक खेती को लेकर प्रशिक्षण दिया। मुख्य अतिथि डॉ. जी. एस पवार ने कहा तिल की खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है। डॉ जगन्नाथ पाठक ने कहा कि प्राकृतिक कृषि पृथ्वी मां के लिए वरदान है, क्योंकि इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है। सस्य विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. दिनेश शाह ने कहा कि उर्द की खेती जल भराव के प्रति संवेदनशील होती है। यह भी पढ़ें- प्रशिक्षण में किसानों ने सीखे प्राकृतिक कृषि के गुर

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