नई दिल्ली, मार्च 22 -- हिमांशु, एसोसिएट प्रोफेसर, जेएनयू पश्चिम एशिया में जारी घमासान ने लगभग पूरी दुनिया की भू-राजनीतिक कमजोरियों को उजागर कर दिया हैं। इससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से युद्ध में शामिल देशों पर तो दुष्प्रभाव पड़ ही रहे हैं, यह जंग दुनिया के बाकी हिस्सों पर भी बुरा असर डाल रही है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित किए जाने से पहले ही तेल-गैस की कीमतों में तेजी आ गई थी और गैस समेत पेट्रोलियम उत्पादों की कमी हो गई थी। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है, क्योंकि वह घरेलू और औद्योगिक- दोनों तरह के इस्तेमाल योग्य पेट्रोलियम उत्पादों के लिए खाड़ी देशों से आयात पर अधिकतर निर्भर करता है। हालांकि, लगता है कि लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कमी पूरी हो जाएगी, पर यह सिर्फ घरेलू व औद्योगिक कार्यों तक सीमित रह पाएगी। ऐसे में, सब...