किशोरों में आत्महत्या के प्रयास करीब तीन गुना बढ़े
नई दिल्ली, सितम्बर 9 -- मानसिक तनाव जब गहरा होता है, तो वह किसी को दिखाई नहीं देता। अधिकांश मामलों में पीड़ित शख्स को भी नहीं पता होता कि उसे खतरनाक जानलेवा बीमारी ने घर कर लिया है। ऐसे में विशेषज्ञ एक बात पर ज्यादा जोर दे रहे हैं कि गहरा मानसिक संकट अक्सर चुपचाप बढ़ता है। अवसाद, चिंता, लगातार निराशा या अकेलापन जैसी परेशानियां सामान्य थकान जैसी नहीं दिखतीं, इसलिए परिवार और आसपास के लोग इन्हें देर से पहचानते हैं। कलंक, शर्म और अपने आप ठीक हो जाएगा वाली सोच के कारण इलाज भी अक्सर देर से शुरू होता है। सच यह है कि ऐसे विचारों और संकट का इलाज संभव है। समय पर बातचीत, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय मदद से जोखिम काफी हद तक घटाया जा सकता है। इसलिए आत्महत्या के विचारों को सामान्य परेशानी नहीं, मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए और संकेत दिखते ही मद...
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