वाराणसी, अगस्त 14 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। किशोरियों को अपने देश, समाज एवं परिवार की संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाज एवं संस्कारों का सम्मान करना चाहिए। उन्हें पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण नहीं करना चाहिए। ये बातें साहित्यकार डॉ.नीरजा माधव ने कहीं। वह शुक्रवार को सारनाथ के अनाथपिंड अतिथि भवन में किशोरी सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। डॉ.शंभुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन की शक्ति परी परियोजना अंतर्गत शुक्रवार 'छू लेंगे आसमां' कार्यक्रम में उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों और वांछित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किए गए प्रयासों का उदाहरण दिये। बालिकाओ को अपना लक्ष्य निर्धारित कर जोश-ओ-खरोश से जुटने का आह्वान किया। अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ की कुलसचिव डॉ.सुनीता चंद्रा ने कहा यथार्थवादी सपनों को लक्...