किशनगंज, मई 1 -- किशनगंज। हिन्दुस्तान प्रतिनिधि हर साल एक मई आता है, लाल झंडे लहराते हैं, भाषण होते हैं और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। किशनगंज की तपती दोपहरी में ईंट-भट्टों पर पसीना बहाते मजदूर हों या फिर रोजी-रोटी की तलाश में पंजाब-हरियाणा की ओर पलायन करते युवा। मजदूर दिवस इनके लिए कोई त्यौहार नहीं, बल्कि अपनी जद्दोजहद की याद दिलाने वाला एक और सामान्य दिन बनकर रह जाता है। इस बार एक मई 2026 को श्रमिक वर्ग नई उम्मीदों के साथ खड़ा है, लेकिन जमीनी हकीकत इन उम्मीदों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। यह भी पढ़ें- मजदूर दिवस: घोषणाओं के बीच अधूरी हैं मजदूरों की कई बड़ी मांगेंनयी लेबर कोड - कागजी कवायद या नई उम्मीद, बड़ा सवाल अप्रैल 2026 से देश में नए लेबर कोड (श्रम कानून) लागू होने की प्रक्रिया ने चर्चाएं तेज कर दी हैं। सरकार ने 29 पुराने श्रम...
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