किशनगंज : एएनएम की सतर्कता और एफसीएम थेरेपी ने महिला को दिया सुरक्षित मातृत्व का नया भरोसा
भागलपुर, जून 24 -- किशनगंज से राकेश कुमार की रिपोर्ट किशनगंज। गर्भावस्था के दौरान खून की कमी केवल एक चिकित्सीय समस्या नहीं, बल्कि मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के जीवन से जुड़ा गंभीर विषय है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार देश की 52.2 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं, जबकि बिहार में यह आंकड़ा लगभग 63 प्रतिशत है। ऐसे समय में आकांक्षी जिला किशनगंज में समय पर जांच, सामुदायिक जागरूकता और एफसीएम थेरेपी जैसी सेवाएं सुरक्षित मातृत्व की दिशा में नई उम्मीद बन रही हैं। इसी बीच जिले में चल रहा डीएबीएस -1 (डाइट एंड बायो मेकर सर्वे ऑफ़ इंडिया -1 ) सर्वेक्षण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आईसीएम् आर- एनआईएन की टीम जिले के चावल-प्रधान आहार और रक्त नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर रही है ताकि आयरन, जिंक, विटामिन बी 12 समेत सूक्ष्म प...
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