भागलपुर, जून 6 -- किशनगंज से राकेश कुमार की रिपोर्ट ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए कालाजार आज भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। यह बीमारी लीशमैनिया नामक परजीवी के कारण होती है, जो संक्रमित रेत मक्खी (सैंड फ्लाई) के काटने से मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है। गंदगी, नमी वाले वातावरण, मिट्टी की दीवारों वाले घर और पशुओं के आसपास रेत मक्खियों की संख्या अधिक होने से इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार नहीं हो तो यह रोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर तिल्ली और यकृत (लीवर) को प्रभावित करता है तथा कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है।इसी खतरे को देखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक कालाजार के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। स्वास्थ्य विभ...