किताब के पन्ने नहीं पढ़ाता, जीवन को समझने की दृष्टि देता है शिक्षक
गोंडा, सितम्बर 3 -- किताब के पन्ने नहीं पढ़ाता, जीवन को समझने की दृष्टि देता है शिक्षक गोण्डा। किसी बच्चे की उंगली पकड़कर पहली बार अक्षर लिखाने वाला शिक्षक कब उसके सपनों को आकार दे देता है, इसका एहसास अक्सर वर्षों बाद होता है। शिक्षक सिर्फ किताब के पन्ने नहीं पढ़ाता, बल्कि जीवन को समझने की दृष्टि देता है। पांच सितंबर को मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस इसी गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षकों के योगदान को नमन करने का अवसर है। पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस आज तकनीक के दौर में और प्रासंगिक हो गया है। यह भी पढ़ें- गुरुओं की प्रेरणा से जीवन में मिली सफलता मोबाइल और इंटरनेट ने जानकारी की पहुंच आसान कर दी है, लेकिन सही-गलत में अंतर समझाने, संस्कार देने और ज्ञान को जीवन-मूल्यों से जोड़न...
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