मिर्जापुर, मार्च 26 -- मिर्जापुर। स्टेशनरी कारोबार कई चुनौतियों से गुजर रहा है। हर साल कोर्स की किताबों और सहायक सामग्री में बदलाव ने कारोबार का गणित बिगाड़ दिया है। पहले कई किताबें दो-तीन साल तक चलती थीं। अब कवर, अभ्यास सामग्री, वर्कबुक या सूची में मामूली बदलाव भी पुराने स्टॉक को बेकार कर देता है। नया सत्र शुरू हो रहा है पर अब तक पूरी किताबें नहीं मिल पाई हैं। किताब-कापी के बढते दाम, नकली-असली पुस्तक के नाम पर उत्पीड़न और ग्राहकों के वाहनों के चालान से भी विक्रेता परेशान हैं। मार्च-अप्रैल में कभी स्टेशनरी की दुकानों में पैर रखने की जगह नहीं होती थी। वासलीगंज, स्वामी दयानंद मार्ग, पक्की सराय, नारघाट और आसपास के बाजारों में कॉपी-किताब खरीदने वालों की भीड़ उमड़ती थी। सुबह से रात तक दुकानों पर अभिभावक, छात्र-छात्राएं और स्कूलों की सूची लिए ल...
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