कटिहार, मई 12 -- कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि जिले में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल अब अभिभावकों के लिए आर्थिक बोझ बनते जा रहे हैं। जिले के कई निजी स्कूलों पर एनसीईआरटी की सस्ती किताबों की जगह महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य करने और अभिभावकों को चुनिंदा दुकानों से खरीदारी के लिए मजबूर करने के आरोप लग रहे हैं। यह भी पढ़ें- स्कूलों में एनसीईआरटी पैटर्न लागू होअभिभावकों का कहना अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों ने किताब-कॉपी को कमाई का जरिया बना लिया है। बाजार में जहां एनसीईआरटी की किताबों का सेट कुछ सौ रुपये में उपलब्ध है, वहीं निजी स्कूलों द्वारा तय किए गए सेट की कीमत हजारों रुपये तक पहुंच रही है। स्कूलों की ओर से अभिभावकों ...