क्रांति भट्ट। थराली, अगस्त 26 -- उत्तरकाशी के थराली की आपदा से मिले जख्मों से उबरने में काफी वक्त लगेगा। लोगों को अपनी छत से लेकर हरेक सामान की व्यवस्था करनी है। वह कहां रहेंगे और कैसे फिर से घर तैयार होगा। आपदा प्रभावितों की इस चिंता के बीच उनके बच्चे एक और उलझन में उलझे हुए हैं। आपदा ने खुशियों के साथ उनके भविष्य के सपने भी छीन लिए हैं। मलबे के ढेर में घर के साथ-साथ उनका बस्ता, कॉपी-किताबें और स्कूल ड्रेस तक सब दब गया है। आपदा प्रभावित थराली, सारी, चैपड़ो के ऐसे 35 बच्चे राहत शिविरों में रह रहे हैं, जिनकी पढ़ाई भी मझधार में फंसी हुई है।पवनेश के पास पढ़ने को कुछ नहीं बचा राड़ी गांव निवासी पवनेश भी राहत शिविर में रह रहा है। वह सातवीं का छात्र है। पवनेश कहता है कि आपदा के बाद से स्कूल बंद है। यहां रहकर पढ़ाई करने जैसी स्थिति है नहीं। वैसे ...
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