लखीसराय, जनवरी 8 -- लखीसराय, कार्यालय संवाददाता। बिहार की जीवनदायिनी नदियों में शुमार किऊल नदी आज अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है। एक तरफ जहां बालू और मिट्टी माफियाओं ने नदी के सीने को छलनी किया है, वहीं दूसरी तरफ लखीसराय नगर परिषद की कार्यप्रणाली ने इसे प्रदूषण के नरक में धकेल दिया है। शहर का सारा कूड़ा-कचरा नदी में फेंक कर नदी को ही डंपिंग यार्ड बना डाला है। जिससे किऊल नदी अब नदी कम और एक विशाल नाला अधिक प्रतीत होती है। नगर परिषद द्वारा फैलाए गए कचरे के कारण नदी का प्रवाह बाधित हो गया है। स्थिति इतनी विकट है कि नदी किनारे बने घरों के शौचालयों की गंदगी और पाइपलाइन का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। इसके अलावा, नदी के किनारों पर हो रहे अवैध अतिक्रमण ने इसके पाट को सिकोड़ दिया है। जो नदी कभी अपनी अविरल धारा के लिए जानी जाती थी, आज वह सड़ां...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.