वाराणसी, अगस्त 31 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। हिंदी आलोचक नामवर सिंह काशी से गहरे जुड़े थे। वह हिंदी आलोचना के गौरव थे जिसकी पुष्टि प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल की किताब 'आलोचना की जमीन और नामवर सिंह' करती है। बीएचयू में रविवार को मुक्ताकाशी मंच पुलिया प्रसंग के 'जनसंवाद' कार्यक्रम में यह विचार मुख्य अतिथि प्रो. विजयनाथ मिश्र ने व्यक्त किया। उन्होंने प्रो. शुक्ल की किताब का लोकार्पण किया। कहा कि नामवर सिंह ने हिंदी साहित्य में नई रेखा खींची जिसने कई बार लोगों को असहज किया। इसके बाद भी उनकी स्थापनाओं की चर्चा होती रही। उन्होंने उन्हें नई पीढ़ी का प्रेरणास्रोत बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नामवर सिंह जन्म शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता आलोचक प्रो. कमलेश वर्मा ने की। उन्होंने कहा कि हिंदी आलोचना में नामवर सिंह दिशासूचक यंत्र की...