वाराणसी, अक्टूबर 2 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। टोक्यो में पैराआर्ट प्रदर्शनी में प्रविष्टि के जरिए उपस्थिति दर्ज कराने वाली दिव्यांग चित्रकार हेमा चौहान को काशी से ही यह विद्या और प्रेरणा दोनों मिली।

कला और संघर्ष काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग में बीएफए तृतीय वर्ष की यह छात्रा मुंह के अलावा अविकसित हाथों और पैरों से भी चित्रकारी कर लेती है। पिछले तीन वर्षों से वह संकटमोचन संगीत समारोह की कला दीर्घा में भी लाइव पेंटिंग का प्रदर्शन करती हैं।

प्रेरणा का स्रोत काशी विद्यापीठ के ललित कला विभागाध्यक्ष और राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि हेमा ललित कला के क्षेत्र में ही आगे बढ़ना चाहती थी, मगर दिव्यांगता उसे परेशान करती थी। चिंताग्रस्त होकर उसने डॉ. विश्वकर्मा से अपनी दुविधा साझा की। डॉ. विश्वकर्मा ने...