वाराणसी, जनवरी 29 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। नगर की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था कामायनी के कलाकारों ने उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक परिषद के आह्वान पर प्रयागराज माघ मेला के मुक्ताकाशी मंच पर पौराणिक कथानक पर आधारित नाटक का अद्भुत मंचन किया। 'अश्वत्थामा हतो, नरो वा, कुंजरो वा' के मंचन ने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी। प्रो. श्याम मोहन अस्थाना द्वारा लिखित नाटक महाभारत के युद्ध के उपरांत युधिष्ठिर के अंतर्द्वंद्व को बखूबी उजागर करता है। युद्ध के दौरान उनके द्वारा बोला गया वाक्य 'अश्वत्थामा हतो, नरो वा, कुंजारो वा' उनके मनोमस्तिष्क पर सदैव हावी रहता है, जिससे वे जीवन पर्यंत उबर नहीं पाते। जिस महाबली योद्धा अश्वत्थामा के संबंध में यह अधूरा सत्य युधिष्ठिर द्वारा बोला गया वह युधिष्ठिर के धर्मराज होने को पाखंड बताता है और द्रौपदी सहि...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.