वाराणसी, जनवरी 27 -- वाराणसी। सुबह-ए-बनारस आनंद कानन की ओर से काव्यार्चन की 49वीं कड़ी में युवा और वरिष्ठ रचनाधर्मियों का संगम हुआ। काशी की उदीयमान रचनाकार शाम्भवी टंडन ने सधे हुए अंदाज से न सिर्फ संचालन में अपनी धाक जमाई, बल्कि श्रीकृष्ण-राधिका पर केंद्रित छंदों के माध्यम से श्रोताओं को प्रभावित भी किया। रचनाकार प्रियंका अग्निहोत्री 'गीत' की अध्यक्षता में हुए इस सत्र में काव्यपाठ की शुरुआत शायरा छाया शुक्ला ने की। उन्होंने श्रीराम को समर्पित अपनी रचना से विशेष प्रशंसा बटोरी। छाया शुक्ला ने सुनाया 'तुम चेतना हो राम मेरे, धर्म के तुम बोध हो, अज्ञानियों के ज्ञान तुम, विद्वतजनों में शोध हो...।' इस क्रम को अहमदाबार से आमंत्रित रचनाकार सौरभ शुक्ल ने अपनी रचना 'कण कण में तुम ही बसे हो अगर तो, खुद को ही क्यों न पुकारूं राम' से आगे बढ़ाया। संचालन...
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