वाराणसी, फरवरी 17 -- वाराणासी। सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के साहित्यिक प्रकल्प काव्यार्चन ने हिंदी साहित्य के इतिहास में मील का पत्थर स्थापित किया है। मंगलवार को काव्यार्चन के 51वें सत्र का विशिष्ट पड़ाव इस नूतन इतिहास के सृजन का साक्षी बना। अस्सी घाट पर मंगलवार को हुए इस विशिष्ट आयोजन में 75 कवियों-कवयित्रियों ने काव्यपाठ किया और संचालक भी बने। हिंदी साहित्य में ऐसा उल्लेख नहीं मिलता, जिसमें किसी एक आयोजन में इतनी बड़ी संख्या में रचनाकारों ने काव्यपाठ और संचालन दोनों किया हो। चार घंटे से अधिक समय तक चले काव्यार्चन के इस अंदाज को अस्सी घाट पर मौजूद सैकड़ों लोगों ने शिद्दत से महसूस किया। यूट्यूब चैनल बनारसी किस्से पर इसके सजीव प्रसारण से जुड़कर देश-विदेश के हिंदी प्रेमी भी इस अनूठे साहित्यिक अनुष्ठान के साक्षी बने। पहले सत्र में काव्यार्चन परि...
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