कार्बन डाइऑक्साइड के साथ सायनो बैक्टीरिया से ऐतिहासिक इमारतों पर बढ़ रहा खतरा
बरेली, अगस्त 18 -- बरेली। धूल, कार्बन डाइऑक्साइड और वायु प्रदूषण केवल पर्यावरण को ही प्रभावित नहीं कर रहे, बल्कि ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों के संरक्षण के लिए भी गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अध्ययन में सामने आया है कि धूल जमाव और बढ़ते कार्बन डाइऑक्साइड स्तर से इमारतों की सतह पर बनने वाली जैविक परत यानी फोटो ट्रॉफिक बायोफिल्म का विकास बढ़ सकता है। इससे सांस्कृतिक विरासत स्थलों के जैविक क्षरण का खतरा बढ़ता है। उनका यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल बायोफाउलिंग में प्रकाशित हुआ है। विश्वविद्यालय के पादप विज्ञान विभाग के डॉ. ललित कुमार पांडेय ने बताया कि शोध के लिए नौ अलग-अलग स्थानों से फोटो ट्रॉफिक बायोफिल्म के नमूने लिए गए। इन्हें वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) और कैनोपी कवर यानी पे...
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