रांची, अगस्त 26 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि धारा 498 ए के तहत अपराध साबित करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि महिला से मांगी गई रकम को दहेज ही कहा जाए। किसी संपत्ति या पैसे की गैरकानूनी मांग को पूरा कराने के लिए महिला को मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, तो यह भी क्रूरता के दायरे में आता है। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने यह फैसला पूर्वी सिंहभूम की अनीता भकत की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनाया। अदालत ने अपीलीय अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें पति और ससुराल पक्ष के तीन लोगों को बरी कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि के फैसले को बहाल करते हुए तीनों आरोपियों को दो महीने के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर क...