इटावा औरैया, जुलाई 25 -- उदी। कारगिल शहीद दिवस पर क्लोगों को अमर शहीद मनोज शर्मा की याद आना स्वाभाविक ही है। शहीद के गांव में बना स्मारक बदहाली का शिकार हो गया है। विजय दिवस पर आसपास के लोग ही उसकी साफ सफाई और फूलमाला की जिम्मेदारी निभा रहे है। नम आंखों से लोग देश के प्रति उनकी सेवा और कुर्बानी को याद कर अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह भी पढ़ें- कारगिल शहीद के गांव पनपुरा की सड़क का नामकरण 27 साल बाद भी नहींमनोज शर्मा का प्रारंभिक जीवन पछायगांव में जन्मे बचपन में अपने फौजी पिता सूबेदार मेजर जगदीश शर्मा की गोद में खेले मनोज के मन में देश सेवा की भावना बाल्यकाल से ही भरी हुई थी। 15 साल की उम्र से ही वह फौज में भर्ती होकर देश सेवा करने की बातें साथियों से करने लगे थे और 20 साल की उम्र में वह फौज में भर्ती भी हो गए। यह भी पढ़ें- कारगि...