फतेहपुर, अप्रैल 11 -- सच्ची लगन किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती, इसे साबित कर दिखाया है यमुना कटरी क्षेत्र के उन बच्चों ने जिनके कंधों पर बस्ते के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी का बोझ भी है। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान' की पड़ताल में शिक्षा के प्रति समर्पण की ऐसी प्रेरक तस्वीरें सामने आई हैं, जो संसाधनों की कमी का बहाना बनाने वालों के लिए एक करारा जवाब हैं। स्कूल से आने के बाद ये नौनिहाल कहीं सब्जी बेचकर हाथ बंटा रहे हैं तो कहीं तंगहाली के बीच कच्ची जमीन पर बैठकर सुनहरे भविष्य की इबारत लिख रहे हैं। पेश हैं निरंजन यादव की रिपोर्ट ​केस-1टमाटर के ढेर के साथ तराजू और कॉपी-कलमएकडला गांव का रहने वाला आठ वर्षीय आदर्श किशनपुर के एक विद्यालय में कक्षा तीन का छात्र है, जो शुक्रवार को यमुना किनारे स्थित एकडला मार्ग पर खेत के टमाटर बेचने के लिए तर...