नवादा, जून 24 -- नवादा जिले के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में स्थित मलिन बस्तियों की जमीनी हकीकत आज भी बदहाली के आंसू रो रही है। काम-धंधे का अभाव, बच्चों की शिक्षा से दूरी और सिर्फ सरकारी अस्पतालों के भरोसे टिकी जिंदगी, यही इन झुग्गीवासियों की नियति बन चुकी है। ​नवादा नगर परिषद क्षेत्र के पम्पूकल चौक के समीप रेलवे की जमीन पर बसी अनधिसूचित मलिन बस्ती इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां लगभग 50 घरों में करीब 200 वाशिन्दे किसी तरह अपना जीवन बसर कर रहे हैं। न रहने को पक्का मकान है और न ही बुनियादी सुविधाएं। यही हाल हिसुआ और वारिसलीगंज नगर परिषद समेत रजौली नगर पंचायत क्षेत्र से सम्बद्ध झुग्गियों का भी है। सुबह की पहली किरण के साथ इन झुग्गीवासियों की केवल एक ही चिंता शुरू होती है, दो जून की रोटी की। हाड़-तोड़ मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह खाने-पीने का जुगा...