बरेली, मार्च 9 -- बरेली, वरिष्ठ संवाददाता। कामकाजी महिलाओं में एनीमिया और प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच) से निपटने की कोशिशों के बीच अब एक नई चुनौती सामने आ रही है। प्रसव के बाद होने वाला मानसिक अवसाद यानी पोस्टपार्टम डिप्रेशन तेजी से बढ़ रहा है, जो खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बीते तीन वर्षों में जिले में इसके मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मनोचिकित्सकों का कहना है कि प्रसव के बाद शारीरिक बदलाव के साथ-साथ मानसिक दबाव भी तेजी से बढ़ता है। परिवार और कार्यस्थल की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती कई महिलाओं को अवसाद की ओर धकेल रही है। प्रसव के बाद 20 से 45 दिन का समय मानसिक रूप से सबसे संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान हार्मोनल बदलाव के साथ-साथ नींद ...